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“पश्चिमी सोन नहर पर 10 मेगावाट सोलर पावर प्लांट मंजूर

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बिहार सरकार ने पश्चिमी सोन नहर के तटबंध पर 10 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाने की मंजूरी दी। जल संसाधन विभाग से NOC मिलने के बाद प्रोजेक्ट जल्द शुरू होगा, राज्य में हरित ऊर्जा उत्पादन और स्थानीय बिजली आपूर्ति में सुधार होगा।

बिहार सरकार ने राज्य में बिजली संकट को दूर करने और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने पश्चिमी सोन नहर के तटबंध पर 10 मेगावाट का सोलर पावर प्लांट लगाने की मंजूरी दी है। जल संसाधन विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए बिजली कंपनी को एनओसी (No Objection Certificate) जारी कर दिया है। इस कदम से बिहार में बिजली उत्पादन, हरित ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण तीनों में सुधार होगा।

यह प्रोजेक्ट राज्य में ग्रीन एनर्जी सेक्टर को बढ़ावा देगा और स्थानीय लोगों को स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट और पर्यावरण सुरक्षा को भी मजबूत करना है।

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सोलर पावर प्लांट का क्षेत्र और क्षमता

प्रोजेक्ट के लिए नहर के शुरुआती एक किलोमीटर के हिस्से को चिन्हित किया गया है। लगभग 80 हजार वर्ग फीट में आधुनिक सोलर पैनल लगाए जाएंगे। यह पावर प्लांट बिजली कंपनी द्वारा सीधे निर्मित और संचालित किया जाएगा। इससे बड़े पैमाने पर हरित ऊर्जा का उत्पादन होगा और लंबित बिजली परियोजनाओं को नया मार्ग मिलेगा।

सोलर पावर प्लांट के शुरू होने से न केवल राज्य में बिजली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर वोल्टेज फ्लक्चुएशन और बिजली कटौती की समस्या में भी कमी आएगी।

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सुरक्षा और तटबंध की मजबूती

जल संसाधन विभाग ने बिजली कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सोलर पावर प्लांट की स्थापना नहर के तटबंधों की मजबूती को प्रभावित न करे। सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। पिछले कुछ समय से विभाग और बिजली कंपनी के बीच तटबंधों के बेहतर उपयोग को लेकर चर्चा चल रही थी।

सोन नहर पर यह प्रोजेक्ट पायलट मॉडल के रूप में कार्य करेगा। यदि यह सफल हुआ, तो भविष्य में कोसी, गंडक और अन्य प्रमुख नहरों पर भी ऐसे मेगा सोलर पार्क स्थापित किए जा सकते हैं।

स्थानीय बिजली आपूर्ति में सुधार

सोलर प्लांट के पूरा होने से स्थानीय स्तर पर बिजली की स्थिर आपूर्ति और कटौती में कमी आएगी। बिजली कंपनी ने जमीन का सर्वे पूरा कर लिया है और NOC मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद आसपास के इलाके इलेक्ट्रिक ग्रिड से जुड़ेंगे और निर्बाध बिजली प्राप्त कर सकेंगे।

पर्यावरण और ग्रीन बिहार

10 मेगावाट का यह सोलर पावर प्लांट पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और राज्य सरकार के ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान को मजबूती मिलेगी।

स्थानीय लोगों के लिए यह प्रोजेक्ट हरित ऊर्जा क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। सोलर पैनल इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस में युवा तकनीशियन, इंजीनियर और मजदूर शामिल होंगे।

परियोजना की प्रमुख बातें

प्लांट की क्षमता 10 मेगावाट, क्षेत्रफल लगभग 80 हजार वर्ग फीट, संचालन बिजली कंपनी द्वारा सीधे, सुरक्षा: तटबंध की मजबूती पर कोई असर नहीं, लाभ: हरित ऊर्जा, स्थिर बिजली आपूर्ति और पर्यावरण संरक्षण।

भविष्य की योजना

यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तो नहरों के किनारे और भी सोलर पावर प्लांट्स स्थापित किए जाएंगे। इससे राज्य में बिजली उत्पादन में स्थिरता आएगी और बिहार हरित ऊर्जा में अग्रणी बनेगा।

सरकार का उद्देश्य केवल ऊर्जा उत्पादन नहीं, बल्कि स्थानीय जीवन स्तर में सुधार और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा देना है।

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